समस्तीपुर में पछुआ हवा से बढ़ेगी ठंड: सुबह हल्का कोहरा और न्यूनतम तापमान में गिरावट की संभावना
समस्तीपुर जिले में मौसम बदलने लगा है। आने वाले दिनों में पछुआ हवा की रफ्तार 5 से 8 किलोमीटर प्रति घंटा तक रहने की उम्मीद है। इससे ठंड और बढ़ेगी और सुबह के समय हल्का कोहरा भी देखने को मिल सकता है।
केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के वैज्ञानिक डॉ. अब्दुल सत्तार ने बताया कि 22 नवंबर तक जिले में ठंड लगातार बढ़ती जाएगी। पछुआ हवा के कारण कनकनी भी महसूस होगी।
🌡️ तापमान में गिरावट दर्ज होने की संभावना
डॉ. सत्तार ने बताया कि अगले कुछ दिनों में:
- अधिकतम तापमान: 26°C से 28°C के बीच
- न्यूनतम तापमान: और कम होने की संभावना
पिछले 24 घंटे में तापमान:
- अधिकतम: 28.5°C
- न्यूनतम: 14.5°C
इससे साफ है कि रात और सुबह की ठंड और बढ़ सकती है।
किसानों के लिए मौसम विभाग की महत्वपूर्ण एडवाइजरी
फसल कटाई और बुआई से जुड़ी सलाह
धान की कटाई और राई की बुआई करें
मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि यह समय धान की कटाई के लिए सही है। किसान धान काटकर राई की बुआई कर सकते हैं।
हरीफ मक्का की बुआई जल्द पूरी करें
किसानों को सलाह दी गई कि:
- इस महीने के अंत तक मक्का की बुआई पूरी कर लें।
- इसके लिए शंकर किस्म (Hybrid) का उपयोग करें।
गेहूं की बुआई और खाद का उपयोग
गेहूं की सिंचित किस्मों की बुआई प्राथमिकता से करें
किसान भाई सिंचित और समकालीन गेहूं की किस्मों की बुआई समय पर करें।
खेत की तैयारी के दौरान जैविक खाद का इस्तेमाल जरूर करें।
आलू, चना और अन्य फसलों के लिए सलाह
आलू की रोपाई शुरू करें
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह समय आलू लगाने के लिए सबसे उपयुक्त है।
चना की बुआई का सही समय
किसान अभी चना की बुआई भी कर सकते हैं।
फसलें बचाने के लिए कीट प्रबंधन
मक्का, मटर, मशहूर और राजमा फसलों पर कजरा पिल्लू (कटवर्म) हमला करता है। ये रात में छोटे पौधों को काटकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।
बचाव:
- खेत में सिंचाई करें
- मिट्टी की दरारों से कीट बाहर आएंगे
- पक्षी उन्हें खा लेंगे
- इससे फसल सुरक्षित रहेगी
पशुपालन से जुड़ी सलाह
- ठंड बढ़ने पर पशुओं को रात में खुले में न रखें
- सुबह और शाम खाने में एक चम्मच नमक दें
- इससे पशु ठंड से बच सकेंगे और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी
निष्कर्ष
समस्तीपुर में आने वाले दिनों में ठंड बढ़ने वाली है और सुबह हल्का कोहरा भी छा सकता है। किसानों को मौसम वैज्ञानिकों की ओर से जारी सलाह का पालन कर फसलों और पशुओं का ध्यान रखने की जरूरत है। सही समय पर बुआई और सिंचाई करके फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।
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