समस्तीपुर: जिले के सरकारी स्कूलों की सूरत अब बदलने वाली है। अब स्कूलों में सिर्फ किताबों वाली पढ़ाई ही नहीं होगी, बल्कि अनुशासन, स्वच्छता और सुरक्षा की एक नई पाठशाला भी चलेगी। बिहार शिक्षा विभाग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए स्कूलों में भटकते कुत्तों पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी अब स्कूल के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों (Headmasters) को सौंप दी है। विभाग का साफ संदेश है कि अब स्कूल परिसर के अंदर न तो खाना बर्बाद होगा और न ही कुत्तों का जमावड़ा लगेगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जारी हुई नई SOP
यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के आदेश के बाद एक नई मानक कार्यप्रणाली (SOP) तैयार की गई है। इस नई गाइडलाइन के तहत अब स्कूलों के गुरुजी को पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल की साफ-सफाई और सुरक्षा की पल-पल की निगरानी करनी होगी। सबसे ज्यादा ध्यान ‘मध्याह्न भोजन’ (Mid-Day Meal) के समय पर दिया गया है। अक्सर देखा जाता है कि लंच के बाद स्कूल परिसर में जूठा खाना इधर-उधर पड़ा रहता है, जिसकी वजह से आवारा कुत्ते स्कूल के अंदर घुस आते हैं। अब ऐसा होने पर सीधी जिम्मेदारी शिक्षकों की होगी।
भोजन के बाद 20 मिनट के भीतर करनी होगी सफाई: डीपीओ
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (मध्याह्न भोजन योजना) सुमित कुमार सौरव ने इस मामले में कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि स्कूल में भोजन खत्म होने के बाद एक भी दाना जमीन पर या खुले में नहीं दिखना चाहिए।
सफाई के लिए ये नियम बनाए गए हैं:
- खाना खत्म होने के तुरंत बाद यानी 15 से 20 मिनट के अंदर क्लास-रूम, बरामदा, भोजनालय और हाथ धोने वाली जगह (Handwash Area) की अच्छी तरह सफाई करनी होगी।
- रसोई घर (Kitchen) के आसपास की जगह को भी पूरी तरह साफ रखना अनिवार्य है।
- बचा हुआ खाना या कचरा सीधे ढक्कन वाले कूड़ेदान (Food Waste Bin) में डालना होगा।
- इस कचरे को हर दिन स्कूल परिसर से बाहर ले जाकर सही तरीके से नष्ट करना होगा।
कुत्तों को खाना खिलाया तो होगी कार्रवाई
डीपीओ सुमित कुमार सौरव ने चेतावनी दी है कि स्कूल परिसर में किसी भी हाल में भटकते कुत्तों को खाना देना या जूठा डालना पूरी तरह प्रतिबंधित है। अगर कोई स्कूल प्रशासन इस नियम की अनदेखी करता है या खुले में कचरा छोड़ता है, तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अब स्कूलों के मुख्य गेट (Entry Gate) पर एक चेतावनी बोर्ड लगाया जाएगा, जिस पर कुत्तों को खाना न देने की सूचना लिखी होगी। इसके अलावा, अब मध्याह्न भोजन किचन के चारों ओर जाली, फेंसिंग या दरवाजे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि कुत्ते रसोई के अंदर न घुस सकें।
स्वच्छता और सुरक्षा की नई मिसाल
शिक्षा विभाग का मानना है कि इन कड़े कदमों से स्कूलों में एक सुरक्षित वातावरण बनेगा। अक्सर कुत्तों के कारण बच्चों में डर बना रहता है और गंदगी से बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। अब गुरुजी सिर्फ क्लास में शिक्षा ही नहीं देंगे, बल्कि एक पहरेदार की तरह स्कूल की मर्यादा और सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेंगे।
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