समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले में राजस्व कर्मचारियों ने अपनी जायज मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी 17 सूत्री मांगों के समर्थन में जिले के तमाम राजस्व कर्मचारी महासंघ भवन कार्यालय परिसर में इकट्ठा हुए और जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। आपको बता दें कि ये कर्मचारी पिछले 11 फरवरी से ही सामूहिक अवकाश (Mass Leave) पर चले गए हैं, जिससे राजस्व विभाग का कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ गया है। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले 8 महीनों से उनकी मांगों को अनदेखा किया जा रहा है, जिससे उनमें भारी आक्रोश है।
बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ के नेतृत्व में प्रदर्शन
यह पूरा प्रदर्शन बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ के बैनर तले आयोजित किया गया। जिले भर से आए राजस्व कर्मचारियों ने एकजुट होकर सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारी संघ संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर सभी कर्मियों ने यह निर्णय लिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे अनिश्चितकालीन अवकाश पर रहेंगे। इस हड़ताल की वजह से आम जनता को जाति, निवास, आय प्रमाण पत्र और जमीन से जुड़े जरूरी कामों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
“सरकार को जगाने का अंतिम प्रयास”: जिलाध्यक्ष मुन्ना सिंह
बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष मुन्ना सिंह ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर कई बार सरकार और आला अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए। उन्होंने कहा, “हमने बार-बार गुहार लगाई, लेकिन न तो अधिकारियों ने हमारी बात सुनी और न ही सरकार ने कोई ठोस कदम उठाया। मजबूरन हमें एकजुट होकर सामूहिक अवकाश पर जाने का फैसला लेना पड़ा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह धरना प्रदर्शन सोई हुई सरकार को जगाने का एक प्रयास है। यदि अब भी सुनवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा।
17 सूत्री मांगों पर 8 महीने से नहीं हुआ कोई काम
बिहार राज्य कर्मचारी संयुक्त मोर्चा संघ के जिला सचिव शत्रुघ्न कुमार ने बताया कि उनकी कुल 17 मांगें हैं। उन्होंने याद दिलाया कि लगभग 8 महीने पहले प्रधान सचिव की ओर से इन मांगों को लागू करने का लिखित आश्वासन दिया गया था। उस समय कहा गया था कि जल्द ही इन मांगों पर ‘अमली जामा’ पहनाया जाएगा (यानी इन्हें लागू किया जाएगा), लेकिन आज तक उस दिशा में एक कदम भी नहीं बढ़ाया गया। इसी वादाखिलाफी से कर्मचारी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और भारी दबाव में काम कर रहे हैं।
काम का भारी बोझ: “8 घंटे की जगह 24 घंटे की ड्यूटी”
प्रदर्शनकारी राजस्व कर्मचारियों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उन पर काम का बोझ इतना ज्यादा डाल दिया गया है कि वे मानसिक रूप से परेशान हो चुके हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि:
- उनसे निर्धारित 8 घंटे के बजाय 24 घंटे काम लिया जाता है।
- साप्ताहिक छुट्टी या सरकारी अवकाश के दिनों में भी उन्हें आराम नहीं मिलता और दफ्तर बुला लिया जाता है।
- अत्यधिक काम के दबाव के कारण वे न तो अपना पेशेवर काम सही से कर पा रहे हैं और न ही अपने परिवार को समय दे पा रहे हैं।
जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा ज्ञापन
कर्मचारियों ने निर्णय लिया है कि वे प्रधान सचिव के नाम एक विस्तृत ज्ञापन जिलाधिकारी (DM) को सौंपेंगे। उनकी मुख्य मांग है कि सरकार जल्द से जल्द उनकी समस्याओं का समाधान निकाले ताकि वे काम पर वापस लौट सकें। कर्मचारियों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर इस बार भी सिर्फ आश्वासन मिला, तो वे पूरे जिले में चक्का जाम और उग्र आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
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