समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले से महिला सशक्तिकरण की एक बहुत ही सुखद तस्वीर सामने आ रही है। जिले की जीविका दीदियों ने आर्थिक विकास की एक नई इबारत लिख दी है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वयं सहायता समूहों (SHG) के गठन के मामले में समस्तीपुर ने न केवल अपना लक्ष्य हासिल किया, बल्कि उससे कहीं आगे निकलकर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है।
लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन: 4650 के मुकाबले बने 4854 समूह
प्रशासन द्वारा इस साल के लिए जिले में कुल 4650 स्वयं सहायता समूहों के गठन का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन महिलाओं के उत्साह और जीविका कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम यह रहा कि जिले में कुल 4854 समूहों का गठन किया जा चुका है। यह उपलब्धि बताती है कि समस्तीपुर की महिलाएं अब घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर आर्थिक रूप से आजाद होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भागीदारी का पूरा विवरण
स्वयं सहायता समूहों के गठन में सबसे ज्यादा सक्रियता ग्रामीण क्षेत्रों में देखी गई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो:
- ग्रामीण क्षेत्र: कुल 4515 समूहों का गठन हुआ है।
- शहरी क्षेत्र: कुल 339 समूहों का गठन किया गया है। ये आंकड़े साफ करते हैं कि गांव की महिलाएं अब बचत करने और समूह के माध्यम से व्यापार शुरू करने को लेकर काफी जागरूक हो चुकी हैं।
बैंकों से मिला भरपूर सहयोग, लक्ष्य से 4 गुना ज्यादा ऋण
बैंकों द्वारा समूहों को वित्तीय मदद देने के मामले में भी जिले ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस वर्ष केवल 1200 समूहों को बैंक से लोन (Credit Linkage) दिलाने का लक्ष्य था। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि अब तक 5500 स्वयं सहायता समूहों को बैंकों से ऋण मिल चुका है। इस वित्तीय सहायता ने महिलाओं को अपना खुद का काम शुरू करने के लिए पंख दे दिए हैं।
छोटे उद्योगों से बदल रही है तकदीर: बकरी पालन से लेकर सिलाई-कढ़ाई तक
जीविका से जुड़ी ये दीदियां अब सिर्फ बचत तक सीमित नहीं हैं। वे अब उद्यमी (Entrepreneur) बन रही हैं। जिले की महिलाएं मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में काम कर रही हैं:
- पशुपालन: बकरी पालन और मुर्गी पालन।
- लघु उद्योग: अगरबत्ती बनाना, मोमबत्ती निर्माण और सिलाई-कढ़ाई।
- खाद्य प्रसंस्करण: अचार, पापड़ और अन्य खाद्य सामग्री तैयार करना। इनमें से कई समूह ऐसे हैं जिन्होंने बहुत छोटे स्तर से शुरुआत की थी, लेकिन आज वे लाखों रुपये का टर्नओवर कर रहे हैं।
सरकारी योजनाओं का मिल रहा है सीधा लाभ
बिहार सरकार की ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ ने इन महिलाओं को बड़ा सहारा दिया है। योजना के तहत महिलाओं को अपना काम शुरू करने के लिए 10-10 हजार रुपये की शुरुआती राशि दी गई है। इसके अलावा, बेहतर काम करने वाली उद्यमी महिलाओं को सरकार की तरफ से 2 लाख रुपये तक की सहायता देने की भी योजना है, जिसका लाभ लेने के लिए जिले की कई महिलाएं कतार में हैं।
जिला प्रबंधक का बयान
समस्तीपुर जीविका के जिला प्रबंधक विक्रान्त शंकर सिंह ने बताया कि जिले में जीविका दीदियां न केवल आत्मनिर्भर हो रही हैं, बल्कि समाज में उनकी एक नई पहचान बन रही है। उनके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हुई है और वे दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।
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