समस्तीपुर एक्सप्रेस न्यूज डेस्क: बिहार के समस्तीपुर जिले से महिलाओं के न्याय से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जिले की पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए ‘महिला आयोग आपके द्वार’ कार्यक्रम की शुरुआत गुरुवार से शहर के परिसदन (सर्किट हाउस) में हो गई है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए आयोजित किया गया है जो लंबे समय से उत्पीड़न का शिकार हैं और न्याय की गुहार लगा रही हैं।
इस दो दिवसीय कार्यक्रम के जरिए महिला उत्पीड़न से जुड़े कुल 212 मामलों की फाइलें खोली गई हैं, जिन पर आयोग की टीम गंभीरता से विचार कर रही है।
महिला आयोग की अध्यक्ष और सदस्यों की मौजूदगी में हो रही सुनवाई
गुरुवार को शुरू हुई इस सुनवाई में बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा मिश्रा खुद मौजूद रहीं। उनके साथ आयोग की सम्मानित सदस्य रश्मि रेखा सिन्हा और श्यामा सिंह भी पीड़ितों की समस्याएं सुन रही हैं।
सुनवाई के दौरान केवल कागजी खानापूर्ति नहीं की जा रही, बल्कि पीड़ित महिलाओं और उनके साथ आए अभिभावकों के बयान आमने-सामने दर्ज किए जा रहे हैं। आयोग का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि आखिर किन कारणों से ये मामले लंबे समय से लंबित पड़े थे और अब तक महिलाओं को न्याय क्यों नहीं मिल पाया। हर एक केस की बारीकी से समीक्षा की जा रही है।
पहले दिन 176 मामलों पर फोकस, दूसरे दिन शेष केसों की बारी
अध्यक्ष अप्सरा मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस दो दिवसीय अभियान को दो हिस्सों में बांटा गया है। कार्यक्रम के पहले दिन यानी गुरुवार को कुल 176 मामलों को लिस्ट किया गया है, जिन पर विस्तार से चर्चा और सुनवाई की जा रही है।
बाकी बचे हुए मामलों की सुनवाई शुक्रवार को दूसरे दिन की जाएगी। आयोग का लक्ष्य है कि हर पीड़ित का पक्ष पूरी शांति और धैर्य के साथ सुना जाए ताकि कोई भी बिंदु छूट न जाए।
जरूरत पड़ने पर FIR और पुलिस अधिकारियों को नोटिस का आदेश
सुनवाई के दौरान अध्यक्ष ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जो मामले आपसी बातचीत या समाधान के लायक होंगे, उन्हें सुलझाने की कोशिश की जाएगी। लेकिन, जहां मामला गंभीर होगा और समाधान की गुंजाइश नहीं होगी, वहां सख्त कानूनी कार्रवाई (अग्रतर कार्रवाई) की जाएगी।
अगर किसी नए आवेदन में यह पाया जाता है कि जुर्म गंभीर है, तो आयोग तुरंत संबंधित थाने को प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश जारी करेगा। यही नहीं, अगर किसी केस में पुलिस की ढिलाई सामने आती है, तो संबंधित थाना अध्यक्ष (SHO) को भी नोटिस जारी कर आयोग के समक्ष तलब किया जा सकता है।
दहेज और शारीरिक शोषण जैसे गंभीर मामलों की भरमार
आज की सुनवाई में सबसे ज्यादा मामले दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, महिलाओं के साथ मारपीट और शारीरिक शोषण से जुड़े हुए सामने आए हैं। कई महिलाएं दूर-दराज के गांवों से नोटिस मिलने के बाद अपनी आपबीती सुनाने पहुंची थीं।
शुक्रवार को जब दूसरे दिन की सुनवाई समाप्त होगी, तब आयोग की ओर से एक विस्तृत ‘समरी’ (सारांश) जारी की जाएगी। इसमें बताया जाएगा कि कुल कितने मामलों का मौके पर निपटारा हुआ और कितनों में पुलिस को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
प्रशासनिक अधिकारियों की रही भारी मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद दिखा। सुनवाई के दौरान एएसपी संजय पांडे, मुख्यालय डीएसपी और जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी रजनीश राय समेत कई आला अधिकारी मौजूद रहे। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से आई महिलाओं की सुरक्षा और सहायता के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे।
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