समस्तीपुर: बिहार का समस्तीपुर जिला जल्द ही एक नई और गौरवशाली पहचान हासिल करने जा रहा है। केंद्रीय संचार मंत्रालय की सहमति और स्थानीय डाक प्रमंडल की खास पहल के बाद अब समस्तीपुर को पहला ‘सुकन्या जिला’ बनाने की तैयारी तेज हो गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जिले की छोटी बच्चियों के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित और मजबूत बनाना है।
क्या है ‘सुकन्या जिला’ बनाने का मुख्य उद्देश्य?
समस्तीपुर को सुकन्या जिला घोषित करने के पीछे एक बहुत ही नेक सोच है। इसका सबसे बड़ा लक्ष्य जिले की बालिकाओं को दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा (Long-term financial security) प्रदान करना है। जब बच्चियां बड़ी होंगी, तो उनकी उच्च शिक्षा, शादी और अन्य महत्वपूर्ण जरूरतों के लिए उनके पास पर्याप्त आर्थिक सहायता मौजूद होगी। डाक विभाग की यह पहल बेटियों के बेहतर भविष्य की नींव रखने जैसी है।
डाक अधीक्षक ने दी जानकारी
डाक अधीक्षक राबिन चंद्र के अनुसार, समस्तीपुर को देश का पहला सुकन्या जिला बनाने का प्रस्ताव आधिकारिक तौर पर दिया जा चुका है। उम्मीद जताई जा रही है कि मार्च महीने से पहले इस पर अंतिम मुहर लग जाएगी और केंद्र सरकार की ओर से पूरी सहमति मिल जाएगी।
दो चरणों में पूरा होगा बच्चियों के चयन का काम
जिले को सुकन्या जिला बनाने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की गई है। इसके तहत पूरे जिले में 5 साल से कम उम्र की सभी बच्चियों की पहचान की जाएगी। जिन बच्चियों का आधार कार्ड नहीं बना है, उनका आधार कार्ड बनवाकर संबंधित डाकघर में उनका ‘सुकन्या समृद्धि खाता’ खोला जाएगा।
- पहला चरण: पहले फेज में समस्तीपुर नगर निगम क्षेत्र पर ध्यान दिया गया है। यहाँ लगभग साढ़े चार हजार (4,500) बच्चियों को चिह्नित करने का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
- दूसरा चरण: दूसरे फेज में ग्रामीण इलाकों पर फोकस किया जाएगा। डाक विभाग की टीम हर गांव और हर घर तक पहुंचेगी। ग्रामीण डाकघरों के अंतर्गत आने वाली बच्चियों का घर-घर जाकर आधार कार्ड बनाया जाएगा और तुरंत उनका खाता भी खोला जाएगा।
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को मिलेगी मजबूती
यह पूरी योजना केंद्र सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का एक अहम हिस्सा है। डाक विभाग अब ‘डाकघर खाता हर घर, घर-घर डाकघर’ की थीम पर काम कर रहा है। विभाग का लक्ष्य सिर्फ खाता खोलना नहीं, बल्कि हर गांव को ‘बीमा ग्राम’, ‘बचत ग्राम’ और ‘सुकन्या ग्राम’ के रूप में विकसित करना है।
छोटी बचत से आत्मनिर्भर बनेंगी बेटियां
डाक अधीक्षक ने बताया कि छोटी-छोटी बचत ही आगे चलकर आत्मनिर्भरता का रास्ता खोलती है। डाकघर में निवेश करना न केवल सुरक्षित है, बल्कि इसमें मिलने वाला ब्याज भी अन्य योजनाओं की तुलना में काफी बेहतर है। इससे अभिभावकों पर भविष्य में अचानक आने वाले आर्थिक बोझ को कम किया जा सकेगा।
सुकन्या समृद्धि योजना के फायदे और नियम
अभिभावकों को जागरूक करते हुए डाक विभाग ने इसे ‘बेटियों के लिए उपहार’ के रूप में देखने की अपील की है। समस्तीपुर जिले में अब तक 86 हजार से ज्यादा बच्चियों के खाते खोले जा चुके हैं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
योजना की प्रमुख बातें:
- खाता खोलने की उम्र: 0 से 10 वर्ष तक की बालिकाओं के नाम पर यह खाता खुल सकता है।
- न्यूनतम राशि: मात्र 250 रुपये से इस खाते की शुरुआत की जा सकती है।
- जमा करने की अवधि: खाते में 15 वर्ष तक पैसा जमा करना होता है।
- मैच्योरिटी: 21 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद पूरा पैसा ब्याज सहित निकाल लिया जाता है। यह भुगतान सीधे खाताधारक यानी बेटी को ही मिलता है।
- टैक्स में छूट: इस योजना में निवेश करने पर आयकर की धारा 80-सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है।
समस्तीपुर का यह कदम न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बनेगा, जहाँ हर बेटी का अपना एक बैंक बैलेंस होगा और वह अपनी पढ़ाई के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहेगी।
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