समस्तीपुर एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क: समस्तीपुर जिले की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत जिले की हजारों महिलाओं के बैंक खातों में सीधे सहायता राशि भेजी गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को घर बैठे रोजगार के अवसर देना और उन्हें समाज में सम्मान के साथ जीने का हक दिलाना है।
मुख्यमंत्री ने एक साथ भेजी 96 करोड़ से अधिक की राशि
सोमवार का दिन समस्तीपुर की महिलाओं के लिए खुशियों भरा रहा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऑनलाइन माध्यम से जिले की 96 हजार 875 महिलाओं के खाते में एक साथ कुल 96 करोड़ 87 लाख 50 हजार रुपये की राशि ट्रांसफर की। योजना के अनुसार, हर महिला के खाते में 10-10 हजार रुपये भेजे गए हैं।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर महिलाओं से अपील की है कि वे इस राशि का उपयोग छोटा-मोटा रोजगार शुरू करने के लिए करें। सरकार का मानना है कि जब महिलाएं खुद का काम शुरू करेंगी, तो वे न केवल अपने परिवार की मदद करेंगी बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी अपना योगदान देंगी।
2 लाख रुपये की और मिलेगी मदद, ट्रेनिंग का भी है इंतजाम
यह तो बस शुरुआत है! सरकार ने साफ किया है कि जो महिलाएं इस 10 हजार रुपये की राशि से अपना काम शुरू करेंगी, उनके काम का आगे चलकर आकलन (Check) किया जाएगा। अगर उनका काम अच्छा चलता है, तो उन्हें अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी दी जाएगी।
इतना ही नहीं, महिलाओं को उनके पसंद के काम में माहिर बनाने के लिए विशेष ट्रेनिंग (प्रशिक्षण) की व्यवस्था भी की गई है। यानी सरकार पैसे के साथ-साथ हुनर सिखाने की जिम्मेदारी भी उठा रही है।

समस्तीपुर कलेक्ट्रेट में गूंजी जीविका दीदियों की आवाज
इस खास मौके पर समस्तीपुर जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट सभागार में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत जिले के डीएम रौशन कुशवाहा, डीडीसी सूर्य प्रताप सिंह और डीपीएम जीविका बिक्रांत शंकर सिंह ने दीप जलाकर की। इस दौरान जिले की 200 से अधिक जीविका दीदियां वहां मौजूद थीं, जिनके चेहरे पर आत्मनिर्भर बनने की खुशी साफ देखी जा सकती थी।
डीएम रौशन कुशवाहा ने जानकारी देते हुए बताया कि समस्तीपुर जिले में अब तक कुल 6,43,551 महिलाओं को 643 करोड़ 55 लाख रुपये की राशि दी जा चुकी है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों की 5,72,990 महिलाएं और शहरों की 70,561 महिलाएं शामिल हैं।
गांव से शहर तक बिकेंगे महिलाओं के बनाए उत्पाद
इस योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि यह ‘सामुदायिक सहकारिता’ पर आधारित है। इसका मतलब है कि महिलाओं को पहले स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़ा जाएगा। ये समूह महिलाओं को काम चुनने और उसे शुरू करने में मदद करेंगे।
महिलाओं द्वारा बनाए गए सामानों को बेचने के लिए सरकार गांव से लेकर शहरों तक ‘हाट बाजार’ विकसित करेगी। इससे महिलाओं को अपना सामान बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और उन्हें सीधे मुनाफा मिलेगा। इस कदम से महिलाएं स्वावलंबी बनेंगी और अपने पैरों पर खड़ी हो सकेंगी।
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