समस्तीपुर शहर के मोहनपुर रोड स्थित एक निजी अस्पताल में मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक प्रसूता महिला को पैसे के लिए बंधक बनाकर रखा गया। महिला का ऑपरेशन किसी प्रशिक्षित डॉक्टर ने नहीं बल्कि अस्पताल के कर्मी ने किया था। इसी लापरवाही के कारण महिला के जुड़वां बच्चों की हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पैसे नहीं देने पर टांके अधूरे छोड़े
परिजनों ने बताया कि महिला के ऑपरेशन के बाद उसके 12 टांके लगे थे। अस्पताल वालों ने पैसे नहीं मिलने पर सिर्फ 10 टांके ही काटे और बाकी 2 टांके छोड़ दिए। महिला को दर्द और तकलीफ़ में रखा गया।
गरीब परिवार ने किसी तरह भैंस बेचकर और चंदा जुटाकर 90 हजार रुपये अस्पताल को दिए, लेकिन प्रबंधन और 40 हजार रुपये की मांग कर रहा था। पैसे पूरे नहीं देने पर महिला को छोड़ा नहीं जा रहा था।
विधायक के हस्तक्षेप के बाद मिली राहत
हताश परिजन स्थानीय विधायक अख्तरुल इस्लाम शाहीन के पास पहुंचे। विधायक ने तुरंत कार्रवाई की और पीड़िता को अस्पताल से छुड़वाकर सदर अस्पताल में भर्ती कराया। वहां बाकी टांके काटे गए और महिला को उचित इलाज मिला।
विधायक ने कहा कि दलालों ने गरीब परिवार को निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया, जहां अप्रशिक्षित कर्मियों ने ऑपरेशन कर दिया। इसी वजह से दोनों नवजात बच्चों की जान चली गई। उन्होंने जिला प्रशासन से अस्पताल को सील कर कार्रवाई करने की मांग की।
अस्पताल संचालक और कर्मी फरार
विधायक के अस्पताल पहुंचते ही वहां की पोल खुल गई। मानकों के विपरीत व्यवस्था देख वह हैरान रह गए। पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद अस्पताल के कर्मी और संचालक मौके से फरार हो गए।
क्या बोले अधिकारी
नगर थाना अध्यक्ष शिवकुमार यादव ने बताया कि अभी तक इस मामले से जुड़ा कोई आवेदन नहीं मिला है। जैसे ही आवेदन मिलेगा, प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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