TRE 3 में क्यों नहीं जारी हो रहा सप्लीमेंट्री रिजल्ट? 8 महीने से सड़क पर शिक्षक अभ्यर्थी
पटना की सड़कों पर पिछले 8 महीने से TRE 3 के अभ्यर्थी सप्लीमेंट्री रिजल्ट जारी करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। लाठीचार्ज, चोट और थकान के बावजूद उनका संघर्ष जारी है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि इस बार सिर्फ उनका ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी “इम्तिहान” है। अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे सरकार को सबक सिखाएंगे।
यह लड़ाई अब सिर्फ नौकरी पाने की जिद नहीं रही, बल्कि न्याय और सम्मान की जंग बन चुकी है।
शिक्षा मंत्री और BPSC का तर्क
- शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने मार्च महीने में विधानसभा में कहा था कि TRE 3 में कोई सप्लीमेंट्री रिजल्ट नहीं निकाला जाएगा।
- उनका कहना था कि बार-बार रिजल्ट निकालने से भर्ती प्रक्रिया में देरी होगी और अब चौथे चरण (TRE 4) की ओर बढ़ना जरूरी है।
- BPSC ने भी स्पष्ट कर दिया कि रिजल्ट मेरिट और नियमों के आधार पर पहले ही जारी किया जा चुका है, इसलिए सप्लीमेंट्री रिजल्ट संभव नहीं है।
अभ्यर्थियों का दर्द
- सुपौल के श्याम बहादुर बोले – “जब सीट खाली है तो रिजल्ट देने में दिक्कत क्या है? सिर्फ जन्मतिथि के एक दिन आगे-पीछे होने से हमें बाहर कर दिया गया।”
- औरंगाबाद की रिंकी कुमारी बोलीं – “आठ महीने से सड़क पर हैं, लेकिन सरकार आंखें मूंदे बैठी है। बेटियों को जंजीरों में बांधना पड़ रहा है, यह शर्मनाक है।”
- सिवान की दिव्य सिंह ने कहा – “हम आंदोलन करते हैं तो पुलिस लाठीचार्ज करती है। सरकार को घमंड है, लेकिन हम दिखा देंगे कि सत्ता जनता तय करती है।”
खाली सीटों का सवाल
TRE-3 में 1 से 12वीं तक के लिए 66 हजार उम्मीदवारों का रिजल्ट जारी हुआ था।
लेकिन 10-15 हजार उम्मीदवारों के नाम कई जगहों पर आ जाने से, हजारों सीटें अब भी खाली हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर सप्लीमेंट्री रिजल्ट जारी नहीं हुआ तो ये वैकेंसी बेकार चली जाएंगी।
आंदोलन और लाठीचार्ज
- 6 मई को अभ्यर्थियों ने सीएम हाउस का घेराव किया, जिस पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई लोग घायल हुए।
- 24 मार्च को शिक्षा मंत्री के आवास पर भी अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया था। हालात बिगड़ने पर मंत्री को पुलिस सुरक्षा में निकालना पड़ा।
सरकार की पलटी और भेदभाव का आरोप
24 मार्च के बाद मंत्री ने कहा था कि वे BPSC को समीक्षा के लिए पत्र लिखेंगे। लेकिन 10 दिन बीतने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार ने STET और डोमिसाइल की मांग मान ली, लेकिन TRE-3 के मुद्दे पर जानबूझकर भेदभाव किया जा रहा है।
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