समस्तीपुर: जिले के आलू उत्पादक किसानों के सामने इस वक्त गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। समस्तीपुर की विभिन्न मंडियों में आलू की कीमत गिरकर मात्र 5 से 6 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। लागत से भी कम दाम मिलने के कारण किसानों में भारी आक्रोश है। इस स्थिति को देखते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा और भाकपा माले ने मोर्चा खोल दिया है और सरकार से आलू पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने की मांग की है।
लागत निकालना भी हुआ मुश्किल, कर्ज में डूब रहे किसान
समस्तीपुर जिले के ताजपुर, पूसा, मोरवा और सरायरंजन जैसे प्रमुख आलू उत्पादक क्षेत्रों के किसान इस मंदी की मार सबसे ज्यादा झेल रहे हैं। किसानों का स्पष्ट कहना है कि वर्तमान बाजार भाव उनकी खेती की लागत का आधा भी नहीं है।
अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता और आलू उत्पादक ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने गणित समझाते हुए बताया कि एक किलो आलू तैयार करने में बीज, खाद, जुताई, सिंचाई, कीटनाशक और मजदूरी मिलाकर लगभग 15 रुपये प्रति किलो का खर्च आता है। इसके बावजूद मंडियों में उन्हें अपनी फसल महज 5-6 रुपये में बेचनी पड़ रही है। यानी हर किलो पर किसानों को 9 से 10 रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है।
अनुभवी किसानों ने जताया दुख
पिछले 25 वर्षों से खेती कर रहे किसान दिनेश प्रसाद सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में आलू की इतनी कम कीमत पहले कभी नहीं देखी। वहीं मोतीपुर के राजदेव प्रसाद सिंह और रवींद्र प्रसाद सिंह समेत दर्जनों किसानों का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज में जगह की कमी और भंडारण शुल्क के कारण वे फसल को रोक भी नहीं पा रहे हैं। छोटे किसान अपनी तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर हैं।
मंडियों में मंदी का क्या है असली कारण?
ताजपुर मंडी के कारोबारी मंजीत कुमार सिंह और श्यामबाबू सिंह के अनुसार, बाजार में आलू की कीमतों के गिरने के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला, स्थानीय बाजार में मांग बहुत कमजोर है और दूसरा, बाहरी राज्यों से आलू की आवक अचानक बढ़ गई है।
हैरानी की बात यह है कि इस साल जिले के कई प्रखंडों में पैदावार भी उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई है। कम पैदावार के बावजूद गिरते दाम किसानों, व्यापारियों और कृषि विशेषज्ञों के लिए गहरी चिंता का विषय बन गए हैं।
MSP लागू करने और सरकारी खरीद की मांग
भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर जल्द ही सरकारी स्तर पर आलू की खरीद शुरू नहीं की गई या बाजार हस्तक्षेप योजना (Market Intervention Scheme) लागू नहीं हुई, तो किसान खेती से किनारा कर लेंगे।
किसान राजदेव प्रसाद सिंह ने मांग की है कि बिहार सरकार को पश्चिम बंगाल की तर्ज पर आलू की सरकारी दर तय करनी चाहिए और इसके लिए तुरंत अध्यादेश (Ordinance) जारी करना चाहिए ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित हक मिल सके।
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