समस्तीपुर। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी जीविका योजना के तहत समस्तीपुर जिले की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। जिले में जीविका समूह की उन महिलाओं के कार्यों की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है, जिन्हें पूर्व में स्वरोजगार शुरू करने के लिए 10-10 हजार रुपये की प्रारंभिक सहायता राशि दी गई थी। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि महिलाओं ने उस राशि का सदुपयोग किस प्रकार किया है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन महिलाओं ने इस छोटी राशि से अपना सफल व्यवसाय स्थापित किया है, उन्हें सरकार अब 2 लाख रुपये तक की बड़ी सहायता राशि प्रदान करेगी ताकि वे अपने कारोबार का विस्तार कर सकें।
जिले में 6 लाख से अधिक महिलाओं को मिला लाभ
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, समस्तीपुर जिले में अब तक कुल 6,43,551 महिलाओं को विभिन्न आय-सृजन गतिविधियों के लिए 643 करोड़ 55 लाख रुपये की राशि बांटी जा चुकी है। इसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाएं शामिल हैं:
- ग्रामीण क्षेत्र: 5,72,990 महिलाएं
- शहरी क्षेत्र: 70,561 महिलाएं
यह राशि छोटे स्तर पर किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई, पशुपालन और कृषि आधारित लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए दी गई थी।
कैसे हो रही है जांच और क्या है प्रक्रिया?
जीविका के जिला कार्यालय द्वारा प्रखंड स्तर पर कैडर और ग्राम संगठन के सदस्यों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए अधिकारी सीधे लाभुक महिलाओं से संवाद कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया जा रहा है:
- व्यवसाय का प्रकार: क्या राशि का उपयोग पशुपालन, सिलाई या अन्य लघु कार्यों में हुआ है?
- आय में वृद्धि: 10 हजार की राशि मिलने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति में कितना सुधार हुआ?
- सफलता का पैमाना: क्या महिला अपना व्यवसाय सुचारू रूप से चला पा रही है?
सफल महिलाओं को प्राथमिकता और 2 लाख का फंड
जीविका के संचार प्रबंधक संतोष कुमार ने बताया कि यह मूल्यांकन प्रक्रिया भविष्य की बड़ी योजनाओं का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन महिलाओं ने प्रारंभिक राशि का सही इस्तेमाल कर सफलता की मिसाल पेश की है, उन्हें 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। इससे महिलाएं अपने छोटे गृह उद्योग को बड़े स्तर पर ले जा सकेंगी।
पारदर्शिता पर विशेष जोर
प्रखंड स्तर के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए। कई महिलाओं ने फीडबैक के दौरान बताया कि इस छोटी सी मदद से उन्होंने अपनी आजीविका शुरू की, जिससे अब वे अपने बच्चों की शिक्षा और घर के खर्चों में योगदान दे पा रही हैं। प्रशासन का मानना है कि इस नई योजना से जिले में महिला उद्यमिता (Women Entrepreneurship) को एक नई उड़ान मिलेगी।
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