जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए समस्तीपुर के वीर सपूत हवलदार सीताराम राय शहीद हो गए। मोरवा प्रखंड के लोदीपुर गांव के रहने वाले 40 वर्षीय सीताराम राय की शहादत की खबर मिलते ही पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई है। एक पिता का संघर्ष और एक बेटे का देशप्रेम आज हर किसी की आंखों में आंसू ला रहा है।
गरीबी से लड़कर पाया था सेना में मुकाम
शहीद सीताराम राय के पिता सूरज राय कोलकाता में ठेला चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उन्होंने खुद कष्ट सहा लेकिन बच्चों की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी। पिता ने बताया कि उन्होंने बहुत ही मुफ़लिसी में बेटों को पढ़ाया ताकि उन्हें वो दिन न देखने पड़ें जो उन्होंने देखे। सीताराम ने गांव के ही सरकारी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ली और पटौदी कॉलेज से इंटर करने के बाद साल 2002 में भारतीय सेना में सिपाही के पद पर बहाल हुए। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा किया और प्रमोशन पाकर हवलदार बने।
आखिरी वीडियो कॉल और शहादत की खबर
बुधवार की सुबह सीताराम ने अपनी पत्नी सुमन राय को वीडियो कॉल किया था। उन्होंने बताया था कि वह ड्यूटी पर जा रहे हैं। किसे पता था कि यह उनकी आखिरी बात होगी। सुबह 11 बजे यूनिट से फोन आया कि उन्हें गोली लगी है और कुछ ही देर बाद उनके शहीद होने की दुखद सूचना मिली।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
शहीद का छोटा भाई शिवानंद राय बताता है कि भाई अभी 15 दिन पहले ही एक शादी समारोह में शामिल होकर वापस ड्यूटी पर लौटे थे। उन्होंने वादा किया था कि वे अप्रैल में दोबारा घर आएंगे क्योंकि घर के बहुत सारे काम अधूरे थे। शहीद का बड़ा बेटा अनुज दोनों पैरों से दिव्यांग है, जिसकी जिम्मेदारी और पिता की बीमारी को लेकर सीताराम हमेशा चिंतित रहते थे। अब परिवार के सामने भविष्य का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
आज पहुंचेगा पार्थिव शरीर
ग्रामीणों के अनुसार, शहीद का पार्थिव शरीर आज देर रात तक पटना और फिर वहां से उनके पैतृक गांव लोदीपुर पहुंचेगा। गांव में ही राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस खबर के बाद से उनकी माता महारानी देवी, पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं पूरे समाज को अपने इस वीर सपूत की शहादत पर गर्व है।
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