समस्तीपुर: विशेष रिपोर्ट शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले समस्तीपुर कॉलेज में इन दिनों छात्र सुविधाओं और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। सोमवार को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) की समस्तीपुर कॉलेज इकाई ने जिला अध्यक्ष राजन कुमार वर्मा की अध्यक्षता में एक विशाल एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया। यह प्रदर्शन केवल नारों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने कॉलेज प्रशासन की वर्षों की शिथिलता और छात्रों की बुनियादी जरूरतों की अनदेखी को उजागर कर दिया है।
प्रशासनिक शिथिलता के खिलाफ छात्रों का ‘हल्ला बोल’
सुबह से ही कॉलेज परिसर में छात्रों का जुटना शुरू हो गया था। जिला अध्यक्ष राजन कुमार वर्मा के नेतृत्व में दर्जनों छात्र नेताओं ने कॉलेज गेट से लेकर प्रशासनिक भवन तक मार्च निकाला और जमकर नारेबाजी की। छात्रों का आरोप है कि कॉलेज के पास संसाधन होने के बावजूद उनका सही उपयोग नहीं किया जा रहा है, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य और कॉलेज का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है।
धरना सभा की अध्यक्षता जिला उपाध्यक्ष गौरव चौहान ने की, जबकि मंच संचालन विवेक विराट ने किया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि कॉलेज प्रशासन फाइलों में विकास की बातें करता है, लेकिन धरातल पर छात्र एक-एक बूंद पानी और बैठने की जगह के लिए तरस रहे हैं।
10 सूत्री मांगें: छात्रों की बुनियादी जरूरतें या प्रशासन की विफलता?
NSUI ने कॉलेज प्रभारी को जो मांग पत्र सौंपा है, उसमें 10 प्रमुख बिंदु शामिल हैं जो सीधे तौर पर छात्रों के दैनिक जीवन और उनकी पढ़ाई से जुड़े हैं:
- भवनों का ‘सफेद हाथी’ बनना: छात्रों का कहना है कि नवनिर्मित परीक्षा भवन, कैंटीन और ऑडिटोरियम हॉल बनकर तैयार हैं, लेकिन उद्घाटन के इंतजार में ये धूल फांक रहे हैं। इन्हें अविलंब छात्रों के लिए खोला जाना चाहिए।
- लाइब्रेरी और CBCS पाठ्यक्रम: नई शिक्षा नीति और Choice Based Credit System (CBCS) लागू होने के बाद भी लाइब्रेरी में पुरानी किताबें ही उपलब्ध हैं। छात्रों ने नई पुस्तकों की तत्काल मांग की है।
- महिला सुरक्षा और हाइजीन: महिला सशक्तिकरण की बातें करने वाले प्रशासन के नाक के नीचे छात्रा कॉमन रूम बदहाल है। NSUI ने इसे क्रियाशील करने और वहां सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन लगाने की मांग की है।
- शुद्ध पेयजल का अभाव: गर्मी का मौसम दस्तक दे रहा है, लेकिन कॉलेज के पहले और दूसरे गेट के बीच शुद्ध पानी के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। यहां वाटर कूलर लगाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
- भ्रष्टाचार और इग्नू (IGNOU) विभाग: धरना के दौरान इग्नू विभाग में चल रही कथित अवैध वसूली का मुद्दा भी गरमाया रहा। छात्रों ने मांग की कि वहां स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति हो ताकि बिचौलिया संस्कृति खत्म हो सके।
- पारदर्शिता का अभाव: कॉलेज में होने वाले निर्माण कार्यों में व्यापक अनियमितता का आरोप लगाते हुए छात्रों ने कहा कि हर कार्य स्थल पर ‘डिस्प्ले बोर्ड’ होना चाहिए, जिसमें लागत और समय-सीमा का स्पष्ट उल्लेख हो।
- साफ-सफाई और स्वच्छता: परिसर और शौचालयों की स्थिति दयनीय है, जिसे नियमित रूप से साफ करने की मांग की गई है।
‘घेरा डालो-डेरा डालो’ और तालाबंदी की चेतावनी
सभा को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष राजन कुमार वर्मा ने कड़े लहजे में कहा कि यह धरना महज एक सांकेतिक शुरुआत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर इन 10 सूत्री मांगों पर ठोस और सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन ‘घेरा डालो-डेरा डालो’ अभियान शुरू करेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके बाद कॉलेज में अनिश्चितकालीन तालाबंदी की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) की होगी। छात्रों के इस रुख से कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
प्रमुख उपस्थिति और समर्थन
इस विशाल धरने में जिले के कई दिग्गज छात्र नेता शामिल हुए। इनमें जिला उपाध्यक्ष ललन यादव, जिला महासचिव मधुकेश गुंजन, जिला सचिव दीपक कुमार सिंह, छात्र नेता सुमन कुशवाहा, अजीत कुमार, आनंद कुमार, बादल यादव, भविष्य कुमार सिंह, एहसान आरजू, अभिषेक राणा, आदेश कुमार, विजय कुमार, रोहित कुमार, सचिन कुमार, मनीष कुमार, मुकेश कुमार, सुजीत कुमार और अजहर सहित सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे।
कार्यक्रम के अंत में कॉलेज प्रभारी महेश कुमार और मौके पर मौजूद स्थानीय पुलिस बल के अधिकारियों को मांग पत्र सौंपा गया। प्रभारी ने आश्वासन दिया है कि वे इन मांगों को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाएंगे, हालांकि छात्र अब केवल आश्वासन से संतुष्ट होने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।
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