BSEB 12th Arts Topper: मजदूरी करने वाले पिता की लाडली ने बढ़ाया जिले का मान, रंजना कुमारी बनीं समस्तीपुर की थर्ड टॉपर

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समस्तीपुर (विभूतिपुर): कहते हैं कि “हौसले के तरकश में कोशिश का वो तीर जिंदा रखो, हार जाओ चाहे जिंदगी में सब कुछ, मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिंदा रखो।” इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर प्रखंड की एक बेटी ने। सीमित संसाधनों, अभावों की जिंदगी और पिता के पसीने की बूंदों को रंजना कुमारी ने अपनी सफलता की स्याही बना दिया है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा जारी इंटरमीडिएट कला संकाय के नतीजों में रंजना ने पूरे जिले में तीसरा स्थान प्राप्त कर अपनी कामयाबी का परचम लहराया है।

राज मिस्त्री की बेटी का कमाल: 464 अंकों के साथ जिला टॉपर सूची में नाम

सिरसी वार्ड-5 की रहने वाली कुमारी रंजना ने इंटरमीडिएट की परीक्षा में 464 अंक प्राप्त किए हैं। रंजना के पिता शिव शंकर महतो पेशे से राज मिस्त्री हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए खाली समय में टोटो भी चलाते हैं। रंजना की यह सफलता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि उसने बिना किसी महंगे कोचिंग संस्थान के, केवल अपनी मेहनत और ऑनलाइन पढ़ाई के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।

मैट्रिक में भी गाड़ चुकी हैं सफलता के झंडे

रंजना की मेधा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह उनकी पहली बड़ी सफलता नहीं है। इससे पहले वर्ष 2024 की मैट्रिक परीक्षा में भी रंजना ने 480 अंक हासिल कर बिहार के टॉप-10 (नौवें स्थान) में अपनी जगह बनाई थी। लगातार दो बड़ी परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन कर रंजना ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती।

संघर्षों से भरा है परिवार का सफर, माँ-बाप का अटूट विश्वास

रंजना की इस कामयाबी के पीछे उनके माता-पिता का तप छिपा है। पिता शिव शंकर महतो दिन भर धूप में राज मिस्त्री का काम करते हैं ताकि बच्चों की फीस भर सकें। वहीं माँ फूल कुमारी, जो खुद केवल 10वीं तक पढ़ी हैं, रात-दिन बच्चों की पढ़ाई की निगरानी करती हैं। माँ का मानना है कि शिक्षा ही वह इकलौता रास्ता है जिससे गरीबी की बेड़ियों को काटा जा सकता है। तीन भाई-बहनों में मंझली रंजना के बड़े सपने अब पूरे परिवार की उम्मीद बन चुके हैं।

बिना कोचिंग, ‘स्वाध्याय’ और ‘ऑनलाइन’ से मिली मंजिल

रंजना ने अपनी इंटर की पढ़ाई प्लस टू गवर्नमेंट एल.एल. हाई स्कूल से पूरी की। जहाँ आज के दौर में छात्र लाखों की कोचिंग पर निर्भर हैं, वहीं रंजना ने ‘स्वाध्याय’ (Self-study) को अपना हथियार बनाया। उन्होंने बताया कि ‘विद्याकुल, पटना’ जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने उनकी तैयारी में बड़ी भूमिका निभाई। रंजना का मानना है कि अगर आप एकाग्र होकर खुद पढ़ाई करें, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है।

अगला लक्ष्य: देश की सेवा के लिए IAS बनने का सपना

अपनी सफलता से उत्साहित रंजना अब रुकने वाली नहीं हैं। उन्होंने बताया कि इंटर की परीक्षा के साथ-साथ उन्होंने CUET की भी तैयारी की है। उनका लक्ष्य देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों जैसे दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU), BHU या JNU में दाखिला लेना है। रंजना का अंतिम लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाकर समाज के वंचित तबके के लिए काम करना और देश की सेवा करना है।

गांव में जश्न का माहौल, रंजना बनीं मिसाल

रंजना की इस उपलब्धि की खबर जैसे ही गांव में फैली, बधाई देने वालों का तांता लग गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने रंजना के घर पहुंचकर उसे मिठाई खिलाई और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। रंजना की यह कहानी आज समस्तीपुर ही नहीं बल्कि पूरे बिहार की उन बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो अपनी आँखों में बड़े सपने संजोए हुए हैं।

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डिस्क्लेमर: यह खबर Samastipur Express की टीम द्वारा तैयार की गई है। समस्तीपुर जिले की विश्वसनीय खबरों के लिए बने रहें हमारे साथ।

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