सांकेतिक चित्र: (Samastipur Express)
समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले में साइबर अपराधियों का दुस्साहस बढ़ता जा रहा है, लेकिन पुलिस की सक्रियता ने एक बार फिर ठगों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। ताजा मामला चकमेहसी थाना क्षेत्र के मालीनगर का है, जहां एक युवक को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लाखों की ठगी की कोशिश की गई। समय रहते पुलिस के हस्तक्षेप से पीड़ित को न केवल वित्तीय नुकसान से बचाया गया, बल्कि उसे इस मानसिक दबाव से भी मुक्त कराया गया।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, मालीनगर निवासी मनोरंजन त्रिवेदी के पास एक अज्ञात व्हाट्सएप वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को TRAI (ट्राई) और ED (प्रवर्तन निदेशालय) का फर्जी अधिकारी बताया। ठगों ने मनोरंजन पर आरोप लगाया कि उनका नाम एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में आया है और उन्हें तुरंत ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया जा रहा है।
अपराधियों ने मनोरंजन पर भारी मानसिक दबाव बनाया और उन्हें घंटों तक वीडियो कॉल पर बांधे रखा। इस दौरान ठग उनसे मोटी रकम ट्रांसफर कराने की फिराक में थे। जैसे ही परिजनों को इस संदिग्ध गतिविधि की भनक लगी, उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस और साइबर सेल को सूचित किया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
सूचना मिलते ही साइबर थाना और चकमेहसी थाना की संयुक्त टीम सक्रिय हुई। पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और मनोरंजन त्रिवेदी को उस वीडियो कॉल से अलग कराया। पुलिस ने तत्काल उनका मोबाइल डिस्कनेक्ट करवाया ताकि कोई भी वित्तीय ट्रांजेक्शन न हो सके। मुक्त कराने के बाद पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित की काउंसलिंग की और उन्हें समझाया कि डराने की जरूरत नहीं है।
“कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं”
इस गंभीर मामले पर साइबर डीएसपी दुर्गेश दीपक ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई शब्द या नियम नहीं है। उन्होंने जनता को जागरूक करते हुए कहा:
“कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। यदि कोई खुद को अधिकारी बताकर डराए, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या नजदीकी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं।”
पहले भी हो चुकी है बड़ी ठगी
समस्तीपुर में यह पहला मामला नहीं है। इसी साल जनवरी में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के एक वरिष्ठ लिपिक, 61 वर्षीय अरुण कुमार से ठगों ने इसी तरीके से 31.74 लाख रुपये की ठगी कर ली थी। हालांकि, उस समय बैंक मैनेजर और साइबर पुलिस की सूझबूझ से पूरी राशि को समय रहते फ्रीज कर दिया गया था, जिससे उनकी मेहनत की कमाई बच गई थी।
सावधानी ही बचाव है
- अज्ञात नंबरों से आने वाले वीडियो कॉल से बचें।
- कोई भी सरकारी विभाग व्हाट्सएप पर आपसे संपर्क नहीं करेगा।
- अपनी निजी जानकारी या बैंक डिटेल्स किसी के साथ साझा न करें।
- किसी भी दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें।
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